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गैस और एसिडिटी से निजात पाने के आसान घरेलू उपाय

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फाइल फोटो

Health News: गैस और एसिडिटी आम समस्याएँ हैं जो आजकल की भागदौड़ भरी और अनियमित जीवनशैली के कारण लगभग सभी को समय-समय पर परेशान करती हैं। देर से या भारी भोजन करना, तनाव और समय पर भोजन न करना इसके कुछ मुख्य कारण हैं। इससे पेट में जलन, पेट फूलना, डकार आना और बेचैनी हो सकती है। दवाइयाँ अस्थायी राहत देती हैं, लेकिन अगर आप स्थायी समाधान चाहते हैं, तो कुछ घरेलू और आयुर्वेदिक उपाय बेहद कारगर हो सकते हैं।

1. धनिया, सौंफ और जीरे की हर्बल चाय

ये तीन आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ पाचन में मदद करती हैं और पेट की सूजन व जलन को कम करती हैं। एक चम्मच जीरा, धनिया और सौंफ को दो कप पानी में 5-7 मिनट तक उबालें। इसे छानकर खाने के बाद गरमागरम पिएँ। यह चाय गैस और एसिडिटी से राहत दिलाने में बेहद कारगर है।

2. त्रिफला का सेवन

त्रिफला तीन औषधीय फलों - आंवला, बिबिटकी और हरीतकी से बनता है। यह पेट की सूजन, एसिड से होने वाले नुकसान और खराब पाचन को बेहतर बनाने में मदद करता है। इसे रोज़ाना रात को सोने से पहले गुनगुने पानी के साथ 10-15 दिनों तक लेने से पाचन तंत्र मज़बूत होता है और एसिडिटी से राहत मिलती है।

3. सोंठ और गुड़

अदरक पाचन अग्नि को बढ़ाता है और गैस से राहत देता है, जबकि गुड़ पाचक एंजाइमों को सक्रिय करता है। एक चम्मच सोंठ पाउडर, एक बड़ा चम्मच गुड़ और एक छोटा चम्मच घी मिलाकर रोज़ाना सेवन करें। इससे पाचन क्रिया बेहतर होती है और गैस व एसिडिटी से राहत मिलती है।

जीवनशैली में ज़रूरी बदलाव

  1. रोज़ाना समय पर खाना खाएँ और चबाकर खाएँ।
  2. तेलयुक्त और भारी भोजन से बचें।
  3. खाने के बाद थोड़ी देर टहलें और तुरंत लेटें नहीं।
  4. दिन भर पर्याप्त मात्रा में गुनगुना पानी पिएँ।
  5. योग और प्राणायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करें।

इन आसान और कारगर उपायों को अपनाकर आप गैस और एसिडिटी की समस्या से हमेशा के लिए छुटकारा पा सकते हैं।


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Written by: Taushif

26 Jul 2025  ·  Published: 05:21 IST

बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर सतीश शाह का निधन, 74 साल की उम्र में ली आखिरी सांस

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Satish Shah Death News: बॉलीवुड और टीवी की दुनिया के मशहूर एक्टर सतीश शाह का निधन हो गया है. 25 अक्टूबर दोपहर 2:30 बजे उन्होंने अपनी आखिरी सांस ली. जानकारी के मुताबिक, वे काफी समय से किडनी की बीमारी से जूझ रहे थे. उनके मैनेजर ने इस दुखद खबर की पुष्टि की है. सतीश शाह का अंतिम संस्कार 26 अक्टूबर को किया जाएगा. फिलहाल उनका पार्थिव शरीर अस्पताल में रखा गया है.

फिल्म और टीवी इंडस्ट्री में शोक की लहर
सतीश शाह के निधन की खबर से फिल्म और टीवी इंडस्ट्री दोनों ही सदमे में हैं. हाल ही में विज्ञापन जगत की शख्सियत पीयूष पांडे के निधन के बाद अब सतीश शाह के जाने से इंडस्ट्री को एक और बड़ा झटका लगा है.

‘साराभाई वर्सेस साराभाई’ से मिली घर-घर में पहचान
सतीश शाह ने अपने लंबे करियर में कई फिल्मों में शानदार काम किया, लेकिन उन्हें असली पहचान टीवी शो ‘साराभाई वर्सेस साराभाई’ से मिली. शो में उन्होंने इंद्रवदन साराभाई का किरदार निभाया था, जो दर्शकों को आज भी याद है. उनकी और रत्ना पाठक शाह (माया साराभाई) की जोड़ी ने दर्शकों को खूब हंसाया था.

टेलीविजन में छोड़ी अमिट छाप
सतीश शाह ने टीवी पर भी कई यादगार किरदार निभाए. उनका सिटकॉम ‘ये जो है जिंदगी’ (1984) आज भी क्लासिक माना जाता है, जिसमें उन्होंने हर एपिसोड में अलग किरदार निभाया था. इसके बाद ‘फिल्मी चक्कर’ और ‘साराभाई वर्सेस साराभाई’ जैसे शोज़ में उन्होंने अपनी बेहतरीन कॉमेडी से लोगों का दिल जीता.

फिल्मों में भी रहे दमदार
टीवी के अलावा सतीश शाह ने ‘मैं हूं ना’, ‘हम आपके हैं कौन’, ‘फना’, ‘मुझसे शादी करोगी’, ‘रा.वन’, ‘साजन चले ससुराल’, और ‘जाने भी दो यारों’ जैसी बड़ी फिल्मों में काम किया। शाहरुख खान की फिल्म ‘मैं हूं ना’ में उनका प्रोफेसर का किरदार दर्शकों को खूब हंसाता था.

निजी जीवन
सतीश शाह का जन्म गुजरात के मांडवी में हुआ था. उन्होंने जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएशन किया और फिर फिल्म एंड टेलीविज़न इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) से अभिनय की पढ़ाई की. 1972 में उनकी शादी डिज़ाइनर मधु शाह से हुई थी. कोरोना काल में उन्होंने कोविड को मात भी दी थी.


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Written by: Taushif

25 Oct 2025  ·  Published: 19:17 IST

मोती की तरह चमक उठेंगे दांत, आयुर्वेद से जानें कैसे रखें ख्याल

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शरीर के हर जरूरी अंग की तरह दांत भी हमारी सेहत का बेहद अहम हिस्सा हैं. सुंदर मुस्कान के साथ-साथ दांत ही भोजन को चबाकर पाचन की प्रक्रिया शुरू करते हैं. अगर दांत और मसूड़े कमजोर हों, तो इसका सीधा असर पेट, पाचन और पूरे शरीर पर पड़ता है. आयुर्वेद में दांतों को पूरे शरीर की सेहत का आधार माना गया है.

Ayurveda के मुताबिक, दांतों को अस्थि धातु यानी हड्डियों से जोड़ा गया है. इसका मतलब है कि दांत जितने मजबूत होंगे, शरीर भी उतना ही मजबूत रहेगा. लेकिन आज की जीवनशैली में गलत खानपान, तनाव और लापरवाही की वजह से कम उम्र में ही दांतों की परेशानी शुरू हो जाती है. मसूड़ों से खून आना, बदबू, कैविटी, पीले दांत और दांत हिलने जैसी समस्याएं आम होती जा रही हैं.

विशेषज्ञों के मुताबिक, दिन में दो बार दांत साफ न करना, जिह्वा की सफाई न करना, तंबाकू का सेवन, बहुत ज्यादा मीठा खाना और बार-बार कुछ न कुछ खाते रहना दांतों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाता है. ज्यादा ठंडा या बहुत गर्म भोजन भी दांतों की जड़ों को कमजोर करता है.

आयुर्वेदिक उपाय जो घर बैठे अपनाए जा सकते हैं
आयुर्वेद में दांतों की देखभाल के लिए कुछ बेहद आसान और कारगर उपाय बताए गए हैं. सबसे पहला उपाय है तेल से कुल्ला करना. सुबह खाली पेट नारियल या तिल के तेल से 5 से 10 मिनट तक कुल्ला करने से दांतों की गंदगी साफ होती है और मसूड़े मजबूत होते हैं.

दूसरा असरदार उपाय है Triphala. रात को सोने से पहले गुनगुने पानी के साथ त्रिफला लेने से पेट साफ रहता है और पाचन मजबूत होता है. जब पेट सही रहेगा, तो दांत भी अपने आप मजबूत रहेंगे. दांत साफ करने के लिए बाजार के केमिकल युक्त टूथपेस्ट की बजाय नीम की दातुन या त्रिफला, लौंग, अजवाइन और नीम की छाल के पाउडर से दांत साफ करने की सलाह दी जाती है. इससे दांतों की चमक बढ़ती है और मुंह की बदबू भी दूर होती है.

लौंग का तेल और सही खानपान भी जरूरी
लौंग का तेल दांतों और मसूड़ों के लिए रामबाण माना जाता है. यह मसूड़ों की सूजन कम करता है और दांतों में कीड़ा लगने से बचाता है. इसके साथ ही दांतों को मजबूत और चमकदार बनाए रखता है. दांतों को स्वस्थ रखने के लिए शरीर में कैल्शियम और प्रोटीन की पर्याप्त मात्रा जरूरी है. सर्दियों में गुड़, तिल, मूंगफली, सूखे मेवे, बीज और छेना को खाने में शामिल करने से दांत और मसूड़े दोनों मजबूत होते हैं.
 


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Written by: Taushif

29 Nov 2025  ·  Published: 19:38 IST

रसोई का ज़ायका और सेहत का खज़ाना, जानिए यह कैसे बनती है और क्यों है खास

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What is Hing: हींग भारतीय रसोई का ऐसा मसाला है जो किसी भी खाने में बस एक चुटकी डालते ही उसका स्वाद और खुशबू कई गुना बढ़ा देता है. दाल, सब्जी या खिचड़ी कहीं भी हींग डाल दी जाए, तो उसका स्वाद और सुगंध तुरंत निखर जाती है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि हींग बनती कैसे है और यह हमारे शरीर के लिए कितनी फायदेमंद है.

हींग क्या है और कहां से आती है?
हींग किसी पेड़ से मिलने वाला साधारण मसाला नहीं है, बल्कि यह एक जंगली पौधे की जड़ों से निकलने वाला गोंद (रस) है. इसकी खुशबू बेहद तीखी और तेज होती है. पुराने समय में इसका उत्पादन खुरासान और मुल्तान (आज के ईरान-अफगानिस्तान क्षेत्र) में होता था, इसलिए इसे बाल्हीक भी कहा जाता है. माना जाता है कि बौद्ध भिक्षुओं के माध्यम से ही यह भारत तक पहुंची.

आज इस्तेमाल होने वाली हींग कैसे बनती है?
भारत में जो हींग इस्तेमाल होती है, वह कंपाउंडेड हींग कहलाती है. इसमें शुद्ध हींग सिर्फ 30% या उससे भी कम होती है. बाकी में मैदा, आटा, गोंद और अन्य चीजें मिलाई जाती हैं, ताकि इसकी तीखी गंध थोड़ी हल्की हो जाए और खाना बनाने में आसानी से इस्तेमाल हो सके. बाजार में मिलने वाली हींग की खुशबू इसी पर निर्भर करती है कि उसमें मिलावट कितनी है. कम मिलावट मतलब गंध ज्यादा तेज.

भारत में हींग की खपत और इतिहास
भारत दुनिया में हींग का सबसे बड़ा उपभोक्ता है, लेकिन लंबे समय तक इसका उत्पादन भारत में नहीं होता था. कच्ची हींग अफगानिस्तान, ईरान और मध्य एशिया से आयात की जाती थी. मुगल काल में आगरा हींग व्यापार का बड़ा केंद्र था. अफगानिस्तान से हींग भेड़ों की खाल में भरकर लाई जाती थी. आगरा पहुंचने के बाद ही हींग और चमड़े का अलग-अलग व्यापार होता था. यहीं से आगरा का जूते का उद्योग भी आगे बढ़ा. आज भारत में हाथरस हींग शोधन का सबसे बड़ा केंद्र है. भारत में हींग की खेती भी शुरू हो चुकी है, जिसके लिए 2016–17 में ईरान से इसके बीज लाए गए थे.

हींग के घरेलू और सेहत संबंधी फायदे
हींग सिर्फ रसोई का मसाला नहीं, बल्कि एक घरेलू दवा भी है. पेट में गैस हो तो हींग को पानी में घोलकर नाभि पर लगाने से तुरंत आराम मिलता है. छोटे बच्चों के पेट दर्द में भी यह उपाय बहुत कारगर है. हींग पाचन सुधारती है, गैस दूर करती है और शरीर की सूजन कम करने में मदद करती है. इसी कारण हींग भारतीय भोजन का जरूरी हिस्सा बन चुकी है. सिर्फ स्वाद के लिए ही नहीं, बल्कि सेहत के लिए भी.


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Written by: Taushif

15 Nov 2025  ·  Published: 12:36 IST